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श्रीगणेश भी निर्विरोध

Posted On: 13 Feb, 2010 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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बात उत्‍तर प्रदेश के विधान परिषद के सभापति गणेश शंकर पाण्‍डेय के गांव की है। शुक्रवार को जब मेरे कदम रिर्पोटिंग के लिए भारत नेपाल सीमा की ओर बढे तो पता चला कि कुछ दूर पर विधान परिषद सभापति गणेश शंकर पाण्‍डेय का गांव है। उसे देखने की उत्‍सुकता को रोक पाने में असमर्थ पाया तो उधर के लिए चल पडा। उत्‍सुकता गांव पर रिर्पोटिंग की नहीं थी बल्कि यह जानने की थी कि उनके गांव में उनका स्‍थान कहां है। उच्‍चन सदन की उच्‍च कुर्सी पर बिना किसी विरोध के तो वह विराजमान हो गये लेकिन उनके गांव की कुर्सी को ले‍कर कितना विरोध होता है। सच मानिए गांव पहुंचा तो एक नये सच से मुलाकत हुई। में यह तो जानता था कि उनकी राजनीति प्रधानों की राजनीति रही है और खुद पहली बार प्रधान ही निर्वाचित हुए थे, लेकिन यह नहीं जानता था कि विधान परिषद सभाप्रति के निर्वाचन में जिस तरह उन्‍हें किसी विरोध का सामना नहीं करना पडा उसी तरह जब उन्‍होंने गांव से राजनीति का श्रीगेणेश किसा तो भी किसी के विरोध का सामना नहीं करना पडा। यानी उनकी राजनीति का श्रीगेश भी निर्विरोध ही हुआ। पता चला कि गांव की परधानी से चलकर उच्‍च सदन के सभापति के कुर्सी तक पहुंचे गणेश शंकर पाण्‍डेय को संघषों के 28 साल बाद एक बार फिर किसी चुनौती का सामना नहीं करना पडा। वह जब गांव के प्रधान पद की लडाई लडने के साथ अपना राजनीतिक सफर शुरू करने के लिए मैदान में उतरे थे, तब भी माहौल ऐसा ही था। उनके खिलाफ समूचे गांव में से किसी ने मोर्चा नहीं खोला और इस बार की तरह तब भी वह अपना पहला चुनाव निर्विरोध जीते। अब जबकि राजनीतिक जीवन के 28 साल बाद वे उच्‍च सदन के उच्‍च कुर्सी पर विराजमान हुए हैं तो उनके चुनाव में दूसरी बार अहम शब्‍द निर्विरोध जुड गया है। गणेश्‍ा शंकर पाण्‍डेय के जीवन से एक तीसरा निर्विरोध भी गहरे जुडा हुआ है। वह है महराजगंज जनपद के उनके गांव देवपुर के ग्राम प्रधान का चुनाव। उनके पैतृक गांव में निवास करने वाले उनके भाई कृपाशंकर पाण्‍डेय ने बताया कि यहां तो समूचा गांव हर चुनाव में मिल बैठ कर निर्विरोध ग्राम परधान ही चुनता है। यह क्रम शुरू से अब तक चला आ रहा है। यानी निर्विरोध सभापति बने श्री पाण्‍डेय का गांव पंचायती राज व्‍यवस्‍था में निर्विरोध चुनाव का नजीर है और हर चुनाव में निर्विरोध का संदेश दे अपनी एका का परिचय देता है। तब भी जबकि पिछले चुनाव में उनके गांव की परधानी सुरक्षित कोटे में चली गयी। महिला प्रधान हुई, लेकिन गांव में मतदान की नौबत नहीं आयी। ठीक वैसे ही जैसे इस बार विधान परिषद में सभापति के लिए वोट डालने की नौबत नहीं आयी और गणेश शंकर पाण्‍डेय निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए। श्री पाण्‍डेय के लिए यह निर्विरोध शब्‍द गांव में भी दो बार इस्‍तेमाल हुआ। उन्‍होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत गांव की परधानी से की और एक बार नहीं बल्कि दो बार परधान चुने गए और वह भी निर्विरोध। एसे में अब यह देखना है कि शुरू से निर्विरोध ग्राम प्रधान चुनाता रहा उनका गांव अगले चुनाव में किस तरह का निर्णय लेता है। तब मतदान के दिन उनके गांव से लौट कर अपनो से इस ब्‍लाग के जरिये निर्विरोध राजनीति पर दूसरी बार चर्चा होगी।

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49 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jonnie के द्वारा
July 20, 2016

The lack of jobs is a result of excessive personal debt, no? So why not treat the disease instead of the symptoms of it?And if people have a need to work then why not restore the population to the family farms that were stolen from them by the counterfeiting cartel, the banks? Isn’t that Jee2;rson&#8f17fs (and the Bible’s) ideal, a nation of small farmers?

Amit Dehati के द्वारा
December 15, 2010

सर वाकई क्या लेखन किया है आपने .काबिल-ए-तारीफ . अच्छी एव दमदार पोस्ट के लिए हार्दिक बधाई ! http//amitdehati.jagranjunction.com

kailash के द्वारा
March 19, 2010

i like ur article veru much ..keep writing

    ज्ञानेन्‍द्र .त्रिपाठी के द्वारा
    March 25, 2010

    प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद

aakash के द्वारा
March 19, 2010

i like ur article veru much ..keep writing

    ज्ञानेन्‍द्र .त्रिपाठी के द्वारा
    March 25, 2010

    धन्‍यवाद

महेश के द्वारा
March 16, 2010

फर्श से अर्श पर पहुंचे व्‍यक्तित्‍व के शानदार अतीत को उकेरा है। बधाई।

महेन्‍द्र गुप्‍ता के द्वारा
March 4, 2010

राजनीति की काली कोठरी में ऐसे एक दीप को बाती देने के लिए धन्‍यवाद।

    ज्ञानेन्‍द्र .त्रिपाठी के द्वारा
    March 25, 2010

    मैने बाती नहीं दी बाती को दिखया है। प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद

amrendra sing के द्वारा
February 21, 2010

Sri ganesh ka Sri ganesh batena ke liya dhanyawad

    ज्ञानेन्‍द्र .त्रिपाठी के द्वारा
    March 25, 2010

    अच्‍छा लगा कि अब आप ब्‍लाक पर भी समय दे रहे हैं। धन्‍यवाद

विजय सिंह के द्वारा
February 20, 2010

इस निर्विरोध राजनीति के अगली पडताल का इंतजार रहेगा। धन्‍यवाद

वनमाली के द्वारा
February 19, 2010

मेरा मानना है पोस्‍ट लिखने का श्रीगणेश भी इसी पोस्‍ट से श्रीगणेश से करना चाहिए था।

    ज्ञानेन्‍द्र .त्रिपाठी के द्वारा
    March 25, 2010

    सही लिखा है आप ने पर तब यह ध्‍यान में नहीं था। धन्‍यवाद

Ratnesh Chandra के द्वारा
February 19, 2010

Through example of Ganesh Pandey the reporter beautifully described a clean part of Indian politics. It showed that good & citizen when become a minister he is welcome by all people and Indian citizen always in favour of good politics.

    ज्ञानेन्‍द्र .त्रिपाठी के द्वारा
    March 25, 2010

    रत्‍नेश चन्‍द्रा जी आप का कमेन्‍ट मिलता है तो काफी खुशी होती है। धन्‍यवाद

संजीव बनर्जी के द्वारा
February 18, 2010

जब राजनीति भ्रष्‍टाचार का पर्याय बनती जा रही है, गणेश के व्‍यक्तित्‍व के माध्‍यम से आपने खुद को हाशिए पर महसूस कर रहे तमाम सच्‍चे राजनेताओं की हौसला आफजाई किया है। गणेश की राजनीति के इस अनछ़ुए पहलू को उजागर करने के लिए थैंक्‍स।

C.J.Thomas, Maharajganj के द्वारा
February 15, 2010

First of all I would like to congratulate Mr. Ghyanendar Tripathi for this beautiful article. A good newspaper journalist collects, verifies, and reports the facts objectively and in an unbiased manner. I think Ghyanendar Tripathi has these qualities. His way of writing is really attractive. I have heard that a good politician serves the people using the best ideas and plans from all sources, regardless of political views. Ganesh Shankar Pandey’s continuous unanimous / undisputed victory shows that he has above mentioned qualities. Otherwise how can a politician win many times unanimously ? It is really appreciable. I wish him all success.

    ज्ञानेन्‍द्र .त्रिपाठी के द्वारा
    March 25, 2010

    थामस जी जंक्‍शन पर आने के लिए धन्‍यवाद

manoj के द्वारा
February 15, 2010

आपने अपने लेख के द्वारा जो सच्‍चाई को सामने लाया है वह कम ही देखने को मिलता है। इससे इंकार नहीं किया जा सकता कि राजनीति में अब सेवा की भावना नहीं दिखाई दे रही। ऐसे में विधान परिषद के सभापति गणेश शंकर पाण्‍डेय का गांव ने जो राह दिखाई है उससे सबक लेने की जरूरत है।

    ज्ञानेन्‍द्र .त्रिपाठी के द्वारा
    March 25, 2010

    मनोज आशा है अन्‍य पोस्‍टो पर भी आप के विचार मिलते रहेंगे। धन्‍यवाद

abhayanad krishna के द्वारा
February 15, 2010

through d article u successly proved d defintion of democrecy that for d people of d people from d people thanks to encourage honest politics which will energise great india

manojtripathi के द्वारा
February 15, 2010

सच को सच्‍चाई से आगे बढाने में जिस सच को आपने आधार बनाया है, शायद वही है महान भारत की आत्‍मा। अगली पोस्‍ट की प्रतिक्षा

sanjay tiwari के द्वारा
February 15, 2010

Good sign of clear democracy nd landmark too,This type of news will create awereness nd a model for others.Pandey ji nd gyanendra do no log badhai ke patra hi-n..

deepak के द्वारा
February 15, 2010

yes, it’s a great and rare thing that a person is elected undisputed over a long period of time. As we all know politics in our country is not very healthy politics. But the public knows what is right, this is one of the main reason for his undisputed victory again and again. regards Deepak

S.K.Tiwari के द्वारा
February 14, 2010

I salute the village and villagers. it’s rare but nice to see that kind of example. and thanks to you Sir for writing all these

Rahul,jaipur के द्वारा
February 14, 2010

i read dis article…u hav higlighted such an untouched issuue…!! nd hope to read similar positive articles frm u in future..

tanmay के द्वारा
February 14, 2010

i like ur article veru much ..keep writing

parul के द्वारा
February 14, 2010

what a great thought.

vikas rohtagi के द्वारा
February 14, 2010

This story or the incidence if replicated at the national politics we will be a great country where we might differ in our opinions but we are one when we are talking about the country. I wish the thought of you sir (writer) ,replicated can change the fortunes of Mother India.

jitendra kumar aggarwal के द्वारा
February 14, 2010

Excelent! lekin aur bhi mudde hain is desh mein jin per likhne aur padhne ki jarurat hai. Keep writing Jitendra Kumar Aggarwal Shahdara Delhi

S. Kumar के द्वारा
February 14, 2010

Good article with weak subject.

Anju के द्वारा
February 14, 2010

आज के ज़माने में राजनितिक जीवन बिना किसी विरोध के चल पाना सच में आश्चर्य की बात है ! आपकी लेख सच में काबिले तारीफ है| आपके दूसरी चर्चा के इंतजार में…………………….

Meenu के द्वारा
February 14, 2010

It is well written article, you have brought out the exact meaning of the word “nirvirodh”. I appreciate your way of writing. Really, it’s intersting

dr.nisha mishra के द्वारा
February 14, 2010

aap ke dwara likha gaya yeh lekh Kafi Srahniya hai. jo aage bdhane ke liye prarit karta hai aur unchi udan bharne ki jigyasa rakhta hai. sath hi samaj aur youwa warg ke liyeh ek acha sandesh bhi hai. Dr. Nisha Mishra, Basti

nushad ahmad के द्वारा
February 14, 2010

aap ke is lekh ko padhane se lag raha hai ki aap men aage bdhane ki jiggyasa hai. Yeh Jigyasa aap ko ek din aap ko bulandiyaon per le jayga. Dr. NISHA MISHRA, BASTI

shailendra के द्वारा
February 14, 2010

It’s realy good way to know about our politician who are the back bone of our Great INDIA. at least we can understand the person and their political back ground through these kind of articles Thanks for writing such kind of thing please keep writing Shailendra Delhi

Avadhesh Kumar Gupta के द्वारा
February 14, 2010

Unupposed and unanimous election………….! Oh so foolish talking. It is loot of democratic ideas and sens………..It is terror and purchasing. If you have a bit of courrage, write real plot of such painfull and undemocratic poliics. Avadhesh Kumar Gupta

anteryami mani के द्वारा
February 13, 2010

apka Ssri Ganesh Alekh padha BAHUT Badhia Laga SAMMAN

deepu के द्वारा
February 13, 2010

maine aap ka blog padha….. jo mujhe pasand aaya…..deepu singh yadav….. lucknow

azhar के द्वारा
February 13, 2010

hello sir , maine aap ka blog padha .jo kafi prabhavit karne wala hai…. umeed hai aap aagye bhi likhenge

saurabh,lucknow के द्वारा
February 13, 2010

sir, main aapka blog padha aur maine dekha aapne jis tarah se nirvirodh rajniti ko pradarshit kiya hai.wo kabile taarif hai .saurabh srivastava lucknow

Arjit tripathi के द्वारा
February 13, 2010

sir, aaj phale baar maine aap ka blog padha. jisme ek saaf raajniti ki jhalak dekhne ko mili hai. aasha hai aap aage bhi bhi kuch naya likhenge……….swapnil srivastava , delhi

Arjit tripathi के द्वारा
February 13, 2010

main aap ka article isse phale bhi kai baar padha hai .aap har baar kuch naya lekar aate hai.aap ka ye article aaj bhi logo ki ekta ko darsha raha hai….jo bharat ke saaf or sundar politics ko dikha raha hai……..

anupam tripathi के द्वारा
February 13, 2010

Maine article pdha.har bade shaks ki yahi kahani hai.ummed karta hu aap is nirvirodh rajniti ki dusri charcha jarur karenge.

gyanendratripathi के द्वारा
February 13, 2010

गणेश के साथ ही सारी दास्‍तान राजधानी पहंुच गई थी, तो कोई पीछे मुड कर क्‍यों देखता भले ही छूट जाता धागा का वह सिरा जिसे पकड गणेश उच्‍च सदन में पहंुचे इस राह का पिछला हिस्‍सा बदरंग रह जाता, आपने अच्‍छी तजबीज की और कद्र भी उस गांव की। जानकारी से भरी पोस्‍ट ने बहुत कुछ दिया। संतोष सिंह

gyanendratripathi के द्वारा
February 13, 2010

उंची कुर्सी पर पहंुची शख्सियत के फर्श पर कलम चलाकर आपने हम जूनियरों को राह दिखाई है, शुक्रिया अभयानंद

gyanendratripathi के द्वारा
February 13, 2010

नई जानकारी के लिए धन्‍यवाद मनोज

    shishir के द्वारा
    February 13, 2010

    nice article ..i likd it..waitng for the nxt one..


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