blogid : 419 postid : 55

मंत्री जी! निर्माण में क्‍यों नहीं दिखती ऐसी तेजी

  • SocialTwist Tell-a-Friend

बुधवार की शाम से लेकर गुरुवार की शाम तक एक पुल के लोकार्पण को लेकर बसपा और कांग्रेस की राजनीति हाई स्‍पीड चली। कांग्रेस ने इस मुद़दे को सड़क से लेकर संसद तक में उठाया तो बसपाई भी इसमें पीछे नहीं रहे। बसपाई ही क्‍यों एक प्रदेश की बहुमत वाली सरकार छटपटाती दिखी। छटपहाट के मायने यह कि बुधवार को अचानक लखनऊ में लोक निर्माण मंत्री ने न केवल आनन फानन में सोनिया जी के क्षेत्र डलमऊ रायबरेली के पुल का उद़घाटन कर दिया, बल्कि प्रशासन ने वहा जा रहे केन्‍द्रीय भू तल राज्‍य मंत्री आर पी एन सिंह का रास्‍ता रोक दिया। छटपटहाट का नतीजा गुरुवार की सुबह देखा गया जब बुधवार को पुल को नाम देने में चुकी सरकार ने गुरुवार को उससे अम्‍बेडर का नाम जोडते हुए एक पुल पर जा कर दुबारा लोकार्पण की तैयारी में लग गयी। उधर कांग्रेसी कार्यकर्ता विरोध स्‍वरूप पुल तक जाने के लिए निकल पडे तो उनकी पार्टी के सांसदों ने संसद में अपने हक के लिए बिगुल बजाया। इन सभी के लिए तथा संविधान और संसदीय मामलों के जानकारो के लिए यह चर्चा का विषय हो सकता है कि पुल के लोकर्पाण का हक किसका है। पर, जनता ने तो यही देखा जिसकी लाठी उसकी भैंस की कहावत चरितार्थ हुई। सवाल यह भी नहीं है कि भैंस किसकी थी और लाठी किसने भांजा। यह भांजने वाले और भैंस पालने वाली जाने। जनता तो यह जानना चाहती है कि एक पुल पर अपना नाम चस्‍पा करने की जो तेजी बसपा व कांग्रेस के बीच दिखी वह किसी पुल के लम्ब्ति निर्माण को पूर्ण कराने में क्‍यों नहीं दिखती। इस डर से तो नहीं कि लोकर्पाण के समय किसी और की सरकार आ जाएगी। कम से कम बहुमत की सरकार में यह डर तो नहीं होना चाहिए। प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री ने जितनी तेज गति से राय बरेली के पुल को जनता को सौंपा उतनी तेज गति से प्रदेश के अन्‍य पुल का निर्माण क्‍यों नहीं पूरा करा रहे हैं। बात सोनियो जी के क्षेत्र की थी और और प्रदेश की मुख्‍य मंत्री मायावती जी के आनबान की थी तो दोनो दल सडक से संसद तक पहुंच गये, लेकिन उन जिलों और स्‍थानों पर पहुंचना किसकी जिम्‍मेदारी है जहां बीसों सालों से दर्जनों पुल अधूरे पडे हैं। उदारहण देखना हो तो अति पिछडे पूर्वाचल के गोरखपुर और बस्‍ती मण्‍डल के ही किसी जिले की यात्रा की जा सकती है। बस्‍ती मंण्‍डल के लोगों को आज भी आजमढ और अम्‍बेडकर नगर जाने के लिए गोरखपुर और अयोध्‍या की यात्रा करनी पड रही है। बीच में सरयू पर दो पुल प्रस्‍तावित हैं, कुछ का कुछ हिस्‍सा तैयार भी हो चुका है, पर इनके पूरा होने की कोई सूरत पिदले बीस से पचीस सालों से नजर नहीं आ रही है। गोरखपुर मण्‍डल का भी यही हाल है। देवरिया में ओवर ब्रिज का निर्माण केवल मुददा बन कर रह गया है। गोरखपुर में भी एक उपरगामी सेतु का निर्माण बिरबल की खिजडी जैसा ही चल रहा है। महराजगंज के दो पुल तो कब के पूरा होने की आस छोड चुके हैं। ऐसे में प्रदेश और केन्‍द्र के सडक व पुल मालिक मंत्रियों से मेरा यहीं सवाल है कि जो तेजी एक पुल के लोकार्पण को लेकर दिखी, जितना हल्‍ला इसके लोकापर्ण को ले कर हुआ, उतनी तेजी और उतना हल्‍ला देश व प्रदेश के सैकडो हजारो पुलो को समय पर पूरा कराने के लिए क्‍यों नहीं होता । अगर उन्‍हे लग रहा है कि पुलो पर आनन फानन में अपना नाम चस्‍पा कर देने भर से जनता उनको विकास पुरूष मान लेगी तो शायद वह भ्रम में हैं। क्‍योंकि मीडिया अब उनके नाम चस्‍पा होने से पहले उनकी मंशा को भी साफ करती जा रही है। देश की साक्षरता बढ रही है। ऐसे में आने वाले समय में यह सवाल और तेजी से उठेगा कि जो तेजी बुध्‍वार को लोकार्पण में दिखी वह परियोजनओं को समय से पूरा कराने में क्‍यों नहीं दिखती।

| NEXT

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (13 votes, average: 4.77 out of 5)
Loading ... Loading ...

177 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Chyna के द्वारा
July 20, 2016

This weblog seems to get a great deal of visitors. How do you promote it? It offers a nice individual spin on things. I guess having something real or suabnattisl to post about is the most important thing.

amrendra के द्वारा
April 4, 2010

neta jis prakar aapna vikas karte hai agar uska 50% bhi desh ke vikas per laga de to shyad desh ka chera hi badal jaye aur unke bhi kuch reputation janta ke bich ban jaye

मोहित के द्वारा
March 23, 2010

लोकार्पण के नाम पर य वर्चस्‍व का जंग है। नेता शायद यह बताना चाह रहे हैं कि जिसका नाम पत्‍थर पर खुदा होगा वही विकास पुरुष है, लेकिन यह उनका भ्रम है। यह जनता है। सब जानती है।

विनय श्रीवास्‍तव के द्वारा
March 19, 2010

बात लाभ लेने की है तभी तेजी देखने को मिली है। अन्‍यथा सच्‍चाई सब जानते है ऐ नेता कितने विकास के प्रति संवेदनशील है।

alka के द्वारा
March 19, 2010

बात सही है अगर यह नेता हमेशा काम करते रहे तो जनता को उंसे कुछ शिकायत होगी ही नहीं। लिखते रहिए।

आदित्‍य के द्वारा
March 16, 2010

यह सब राजनीति का खेल है। आगे बढकर श्रेय लेने का होड हैं। आपने बडी करीने से इनके मुखौटा को उतारा है। इसके लिए आपको बधाई। ऐसे ही लेख के इंतजार में।

अभिषेक के द्वारा
March 9, 2010

यही तो राजनीति है सर जी। आपने बडी खूबसूरत ढंग से इसको शब्‍दों के मार्फत उकेरा है। इसके लिए आपको बधाई।

मनीष के द्वारा
March 9, 2010

सही कहा आपने। राजनीतिक सुर्खियों में बने रहने में ही राजनेता अपनी सारी ताकत झोंक दे रहे हैं। काश विकास के प्रति भी उनमें झटपटाहट इसी तरह देखने को मिलता तो देश की तस्‍वीर कुछ और होती। अगले लेख के इंतजार में।

s. kumar के द्वारा
March 8, 2010

bahut badhia

janbaz के द्वारा
March 6, 2010

aap ne bilkul sahi kaha. roti ka gana a public hai a sab janti hai charitarth hoga ane do chunao.sab pata chal jayaga.

Ratnesh Chandra के द्वारा
March 6, 2010

This report showed painful picture of Indian politics and selfish leaders. Before vote they made several promises and projects but long term project remain unfulfilled because it may crossed their time. To take a step toward developed India, our leader must have to look over interest of common people not only for their own.

ble900 के द्वारा
March 6, 2010

हैलो मेरा नाम याद है आशीर्वाद मैं अपनी प्रोफ़ाइल देखने और जैसे तुम मुझे वापस मेरे निजी ईमेल पर संपर्क कर सकते हैं soumah.Blessing@yahoo.co.uk) मेरी तस्वीर है और मेरी जानकारी अपने मेल के लिए इंतज़ार कर रहा हूँ धन्यवाद आशीर्वाद Hello my name is miss Blessing i see your profile and like it can you contact me back at my private email(soumah.Blessing@yahoo.co.uk) to have my photo and my details am waiting for your mail thanks Blessing

    महेन्‍द्र गुपता के द्वारा
    March 6, 2010

    आप का ब्‍लाग तो खाल है

ASHISH RAJVANSHI के द्वारा
March 5, 2010

कल्पना करें की पुल किन्ही वजहों से गिर जाए और जान-माल की क्षति (ईश्वर न करे) हो जाए तो स्थितियां इसकी जस उलट हो जायेंगी | यही राजनितिक सच्चाई है |

मनोज के द्वारा
March 5, 2010

ज्ञानेन्द्र जी, आपके बात सही है अगर यह नेता हमेशा काम करते रहे तो जनता को उंसे कुछ शिकायत होगी ही नहीं.

sanjay tiwari के द्वारा
March 5, 2010

Gyanendra ji,Chaliya is bahane kuch to Vikas hua..Ye Bedard kisi ka bhala soch hi nahi sakate …Samik muddo-n ko yuhi uthate rahiye,Janta intajar kar rahi hi…


topic of the week



latest from jagran