blogid : 419 postid : 79

बहन जी जियो हजारों साल

  • SocialTwist Tell-a-Friend

पिछले दो दिनों से जब सुबह अखबार पढ रहा हूं और शाम को जागरण जंक्‍शन पर जा रहा हूं तो भाई लोगों को बहन जी पर ही बरसते पा रहा हूं। टीवी पर तो सपा, कांग्रेस व भाजपा ने उनके खिलाफ एक अभियान ही चला रखा है। मुझे समझ में नहीं आ रहा है ये लोग इतना परेशान क्‍यों है। माला पहनना कोई गुनाह तो नहीं है। खैर विरोधी तो हमेशा विरोध ही करेंगें। पहले मूर्तियों के नाम पर हाय तौबा से सुर्खियो में रहे और अब माला पर हल्‍ला मचा रहे है। उन्‍हें भले ही बहन जी का माला अच्‍छा नहीं लगा हो, लेकिन मुझे तो बहन जी का यह नया कदम खूब भाया। मुझे क्‍यों रैली में गये लाखों दलितों की नजरों में भी खूब समाया। विरोधी क्‍या इसका जवाब दे सकते हैं कि, इसके पहले एक साथ एक करोड रुपये दलितों को किसी ने दिखाया है। किसी ने नहीं। वे तो महज भाषण में कहा करते रहे कि दलित उत्‍थान के लिए सरकार करोडों रुपये की व्‍यवस्‍था की है। एक साथ एक करोड दिखाने का किसी ने प्रयास नहीं किया। यह श्रेय बहन जी को जाता है। पहली बार उन्‍होंने लाखों दलितों को एक साथ हजार हजार की नोट की शक्‍ल में एक करोड दिखाया। अब दलित सीना फूला कर कह सकते हैं कि हमने एक साथ ही एक करोड रुपया देखा है। इनसे पूछिये कभी हजार की नोट भी मुश्किल से देखने वाले ये लोग करोड रुपये एक साथ देख कर कितना खुश हैं। अब दलित बस्‍ती में कोई यह नहीं कह सकता है कि एक साथ लाख रुपये या करोड रुपये देखे हो क्‍या। एक और बात, हजारों रूपये का ही सही फूलों की माला पहन कर कुछ देर बाद उसे फेंक देने वालों को यह भी सोचना चाहिए कि बहन जी शायद ही कभी इस माले को अपने से दूर करेंगी। क्‍या उनकी तरह विरोधी दल के लोग लम्‍बे समय तक अपनी माला की चिंता करते है। नहीं, यह चिंता पहली बार केवल बहन जी ने किया है। रुपये की खातिर ही सही वह अपने समर्थकों के इस प्‍यार को लम्‍बे समय तक अपने पास रखेंगी। समर्थक प्‍यार को इनता करीब रखने का रिकार्ड भी उन्‍हीं के नाम होगा। विरोधी दल क्‍या जाने पर बहन जी को तो यह भी मालूम था कि अगले दिन से ही नवरात्रि है। देवी को चढाने के लिए ढेर सारे फूलों क जरूरत पडेगी। ऐसे में उन्‍होंने फूलों की माला न पहन कर मंदिरों के लिए फूल भी तो बचाया। अब मालियों को यह बात बुरी लगे और फूल के कारोबारी इसे अपने करोबार में आए गिरावट का कारण बता बहन जी को दोषी ठहराये तो यह अन्‍याय ही है। दलित बस्‍ती में रहेने वाले आज तक कवेल करोडो की योजना, करोडो की लागत, करोडो का खर्च मात्र ही सुन कर संतोष करते रहे हैं कभी एक साथ एक करोड ईंटा और ढेला भी नहीं देखे, लेकिन भला हो बहन जी का उन्‍होंने उनको एक साथ करोड रुपये दिखा धन्‍य कर दिया। यह भी बता दिया कि यह आप जैसे लोगों ने ही अपने प्‍यार के रूप में दिया है। यह और बात है कि यह सुनने वाले कुछ विरोधी अपना जेब टटोले और दूसरों की ओर मुंह कर मौन शब्‍दों में सही यह पूछने लगे किसने दिया है। उन्‍हें कौन बताए कि दिया किसी ने भी हो लेकिन है तो बहन जी के पास यानी दलित की बेटी की बेटी के घर ही न । किसी मनुवादी के पास थोडे एक करोड रुपये का हार है जो दलितों को चिंतित होने की जरूरत है। माला ही क्‍यों मूर्तियों पर विरोध जताने वाले से भी हमारा विरोध है। आजादी के बाद से आज तक दलित बस्तियों के विकास का दावा किया जा रहा है, लेकिन न तो बस्तियों का विकास हुआ और न ही दलितों को पानी, सडक और मुकम्‍मल बिजली की रौशनी ही मिली। बहन जी ने कम से कम इतना तो व्‍यवस्‍था कर ही दिया है कि दलित बस्तियों में न सही प्रदेश की राजधानी में ही सही दलित अपने महापुरूषों की विशाल मूर्तियों के चारों ओर बने पार्क में पानी, सडक और रौशनी ही नहीं बल्कि फब्‍बारों तक का दर्शन कर सकंगे, वरना आज तक तो किसी ने उनके सपनों में भी ऐसा कुछ भेजने का प्रयास नहीं किया। हां, यह सवाल विरोधी उठा सकते हैं कि वहां तक पहुंचने के लिए दिलितों के पास किराया तक नहीं है तो मेरा कहना है कि सब बहन जी के कार्यकाल में थोडे ही होगा, कुछ आने वाली सरकारों के लिए भी तो शेष रहना चाहिए। वरना वे इस बात को मुद़दा बना देंगे कि बहन जी ने तो दलितों के लिए करने को उनके लिए कुछ छोडा ही नहीं। ऐसे में बहन जी के लिए मैं लम्‍बी दुआ करना चाहता हूं कि आप जियो हजारों साल। करोड रुपये का विकास दलित बस्तियां देखे या न देखे हर साल करोड रुपया तो एक साथ देंखेगे ही, जैसा कि बहन जी के एक खास भाई ने कहा कि बहन जी चाहे तो हर बार इसी तरह का हार पेश होगा।

| NEXT

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (13 votes, average: 4.38 out of 5)
Loading ... Loading ...

380 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shermaine के द्वारा
July 20, 2016

Believe it or not, Under My Thumb was the first St;12&#8en7os song I put on the BMM playlist and is the fifth song that was placed on the list …A classic from before the Stones turned to pop…

amrendra के द्वारा
April 4, 2010

very well wrote mayawati only wants to show prestige in U.P.

ashish shukla के द्वारा
March 28, 2010

sahi hai jis pradesh ku chief minister aisi hai usse aur kya umeed ki ja sakti hai. log hain chutiya jinhe nahi najar ata is mala ke peechhe ka raj aur journal ki halat agar aisa hi chalta raha to kuchh kido bat maya maya ho jayengi aur hum swarn unke chakar. khair suruat to ho chuki hai

Tufail A. Siddequi के द्वारा
March 25, 2010

त्रिपाठी जी अभिवादन, माया जी ने माया का हार पहन कर करोड़ो की पब्लिसिटी मुफ्त में ही करवा ली ये तो आप ने नोट कर लिया लेकिन “बहन जी जियो हजारों साल”; का शीर्षक देकर अपना लेख सभी से पढवाए जा रहे है ये आपने नोट नहीं किया. हमने तो सोचा की आप माया जी को शुभकामना स्वरुप दीर्घ आयु होने के लिए कह रहे है. लेकिन पूरे लेख में उनकी छीछालेदर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी आप ने, इसे सभी पाठकों ने नोट किया होगा. धन्यवाद.

    ज्ञानेन्‍द्र त्रिपाठी के द्वारा
    March 26, 2010

    इसी तरह उत्‍साह वर्द्धन करते रहिए।

त्रिपुरारी के द्वारा
March 24, 2010

वाह भाईया लेख पढकर मजा आ गया।

प्रकाश के द्वारा
March 24, 2010

दिलचस्‍प अंदाज में शानदार लेखन के लिए बधाई।

प्रकाश के द्वारा
March 24, 2010

जानते हैं अगर मायावती जी ने रुपयों की माला न पहनी होती तो शायद इस रैली को देश विदेश मे मीडिया के द्वारा इतनी पब्लिसिटी न मिलती इतनी बड़ी रैली और बैठे बिठाये बिना खर्च के मीडिया द्वारा इतना प्रचार वास्तव मे प्रबंधन की दाद देनी पड़ेगी वास्तव मे आपने कमाल का लिखा है.

अमरेश के द्वारा
March 24, 2010

दलित आइना दिखाने के लिए बधाई।

यामी मणि के द्वारा
March 24, 2010

बहन जी के दीर्घायु वाला आपका यह अंदाज बिल्‍कुल नया है। पढ कर अच्‍छा लगा।

अखिल जयंत के द्वारा
March 23, 2010

क्‍या खूब लिखा भाई।

subhash के द्वारा
March 21, 2010

achcha laga

sanjay tiwari के द्वारा
March 19, 2010

very nice post.

    Ethanael के द्वारा
    July 20, 2016

    Well I, for one, think that your crsnasoits look awesome – shape and honeycomb included. They look flaky and delicious and absolutely fantastic. Really great job.

shailza के द्वारा
March 19, 2010

बहुत बढिया लिखा है आपने।

ambrish के द्वारा
March 19, 2010

सम्‍मान के साथ अलग शैली में बहन जी को दलित आइना दिखाने के लिए बधाई।

Durga Dutt के द्वारा
March 19, 2010

ज्ञानेंद्र जी, जानते हैं अगर मायावती जी ने रुपयों की माला न पहनी होती तो शायद इस रैली को देश विदेश मे मीडिया के द्वारा इतनी पब्लिसिटी न मिलती इतनी बड़ी रैली और बैठे बिठाये बिना खर्च के मीडिया द्वारा इतना प्रचार वास्तव मे प्रबंधन की दाद देनी पड़ेगी वास्तव मे आपने कमाल का लिखा है.

    ज्ञानेन्‍द्र त्रिपाठी के द्वारा
    March 19, 2010

    दर्गा दत्‍त जी, आप ने ठीक लिखा है, लेकिन कभी कभी ज्‍यादा पब्लिसिटी भी नुकसान की ओर ले जाती है। यह और बात है कि तब सब कुछ अच्‍छा लगता है और करीब आती बुराई नहीं दिखती है।

SUNEEL PATHAK Dainik Jagran faizabad के द्वारा
March 19, 2010

बहन जी माला तो आजकल चर्चित हो गई। सुबह ही मेरे पास एक कार्टून किसी ने भेजा था उसमें भी बिल्‍कुल ऐसा ही कुछ था।

    ज्ञानेन्‍द्र त्रिपाठी के द्वारा
    March 19, 2010

    सुनील आप को प्रतिक्रिया देने के लिए बधाई, मुझे आप के कमेंट का इंतजार भी था। बस्‍ती में तैनाती के दौरान आप से कई बार फोन पर बात भी हुई थी। एसे में अब ब्‍लाग पर भी वार्ता करने में अच्‍छा लग रहा है।

अभयानंद कृष्‍ण के द्वारा
March 19, 2010

दलित विमर्श पर दया पवार का लिखा एक उपन्‍यास पढा था अछूत। त्‍योहारों पर दाल भात के साथ बडे घरों से अचार खाने की बच्‍चे की खुशी उसे अपने घर में अब तक नहीं नसीब हो सकी है। माया भी माया ही फैला रही हैं। एक करोड़ दिखाकर उनके मन में हूक उठाना आखिर क्‍या है। पोस्‍ट के जरिए वि‍विधता पूर्ण लेखन का एक और उदाहरण आपने पेश किया। इसके लिए शुक्रिया।     

bodhisatvakastooriya के द्वारा
March 18, 2010

२०० करोड की भीम नगरीऔर ५ करोड की माला, मायावती ने किया,आज प्रजातन्त्र का मुंह काला ! लगता है जनसेवक नही,उनके नाम पर अभिशाप है, दलितों की बातें करती है,पर राजाओं की भी बाप है! ३००० शौचालय लख्ननउ भीम नगरी में बनवाए गए, और दलितों को कितने ही,स्वप्न-सलोने दिखाए गए! दलितों को खेतों और सड्कों पर शौच करना पड्ता है, स्वास्थ से उनके खिलवाड -घूरा उनके द्वार पर सड्ता है! काश कोई उनकी समस्याओं को उनकी नज़र से देखता, हर दल दलित वोट बैंक हथिया उस पर रोटी नही सेकता! समस्याओं को छोड,हर कोई,अपनी-अपनी झोली भर रहा है, कहांसे आता है इतना पैसा?,बताने से भी हर कोई डर रहाहै! गरीब दो वक्त की रोटीके लिये ,क्या क्या जुगाड करता है, तब कहीं जाकर कहीं उसके परिवार और उसका पेट भरता है!

    ज्ञानेन्‍द्र .त्रिपाठी के द्वारा
    March 19, 2010

    प्रतिक्रिया के माध्‍यम से ही सही आप ने दलितो का पूरा हाल ही बया कर दिया है। अगर आप ब्‍लाग न लिखते हों तो इसे शुरू कर दीजिए और अगर लिखते हैं तो मुझे भी उसका नाम बताइए।

ajit singh के द्वारा
March 18, 2010

आपने आलोचना तो की है मगर खूबसूरत अंदाज में। बेहद पसंद आया। अगले लेख के इंतजार में

sonu के द्वारा
March 18, 2010

सबकुछ तो ठीक है, लेकिन देखना यह है कि हर बार माला पहनाने का संकल्‍प लेने वाले उनके खास भाई कब तक खास रहते हैं।

मुकेश रस्‍तोगी के द्वारा
March 18, 2010

ज्ञानेन्‍द्र जी, यह सही है करोडो की माला पहनने वाली मुख्‍यमंत्री को दलित बस्तियों में भी झांकना चाहिए। किराए की बात कर तो आपने दलितों के प्रति मायावती को ही नहीं सभी को कटघरे में खडा कर दिया है। वैसे हेडिंग से तो लगा कि आप बडाईयों की पुल बांधने वाले हैं, लेकिन अंदर जाने पर पता चला कि आपने सच लिखा है।

vinod के द्वारा
March 18, 2010

सच ब्‍लाग के माध्‍यम से आपने शानदार तरीके से मायावती जी की खिंचायी की है। अद़भुत शैली में लिखा यह लेख दिल को खुश कर दिया। इसके लिए आपको बधाई। ऐसे ही लिखते रहिए।

March 18, 2010

सम्‍मान के साथ अलग शैली में बहन जी को दलित आइना दिखाने के लिए धन्‍यवाद। मनोज त्रिपाठी

    om prakash shukla के द्वारा
    March 26, 2010

    mayavati se jalne walo me ap bhi sumar ho gaye.Aj bahujan samaj party ki taraf se Sonia Gandhi ka noto ki mala pahane photo jari kiya hai Tath sone ka mukut pahane aur mulayam singh ka chandi ka gada liye.Akhi yah chije aplogo ke nigah se kaise bach jati hai,nischaya hi isme media ka pakchpat hai.Ager Mayavati choti jat ki nahi joti to aisa kadapi nahi hota.Bahujan samaj ko media ke tatha uchi jatio ke sajish ka bkhubi pata hai, isi liye kitani hi bar B.S.P. me vibhajan hua lekin Mayawati la vote percentage badhata hi gaya hai.Ab viroshi kitana bhi halla machaye Bahan ji ke sehat per koi asar nahi padane wala hsi.unaka vote bank aur pucca ho raha hai

    darshanbaweja के द्वारा
    March 31, 2010

    धन धन बहन जी

    sp के द्वारा
    April 1, 2010

    आज मायजी की माला पर इतना हॉल हो रहा है जैसे बाकी सब सारीफ़ है. आज लोग मायजी की प्रसीधी से इतना दर गये है. जिसका कोई जवाब� नही. आज अगर मेरे पास इतना धन होता तो मे मायावतीजी का इतना भव्या मंदिर बनवाता जैसा आज तक किसी देवी या देवता का नही बना होगा. एक दिन ज़रूर बाँवौनगा. सब दलित बीरोधी मानसिकता के लोग मायावतीजी के खिलाफ हो गये है. सारा धन कार्यकरताऊ के द्वारा जुटाया गया. देश मा एटने लोग है अगर एक रुपया भी देंगे तो करोरो इकाता हो जाएगा. सारे देश के लोगो ने पैसा दिया है जो भी दलित बीरोधी नही है.� पुराने नेताओ ने इतना देश को लूटा है जिसका कोई हिसाब नही है. कभी उनसे भी पुंच्छो उनके पास इतना पैसा कान्हा से आया. मंदिरो मे इतना दान आता है कभी उसका भी टॅक्स ले लिया करो. मंदिरो मे अराबो की कमाई डेली होती है जिसका कोई हिसाब नही है. कभी वान्हा भी इंकों टॅक्स वेल जाके पता करने का कास्ट करे पैसा कानहासे आता है� और उसका क्या होता है. मेरा लेख मत काटीएगा संपादक महोदैजी. आपसे� बिनाम्रा अनुरोध है. हमारे देश मे लाखों मंदिर है जिनमे अरबों रुपये का चदवा डेली आता है. उस पैसे का क्या होता कान्हा जाता है वो पैसा और किसकी मेहनत का होता है. आज मायावतीजी को भेंट की गयी माला जो की डेस्क के लाखों करकर्ताओ के द्वारा भेंट की गयी है. उसपे इतना हे हल्ला क्यूँ हो रहा है. सारे बीरोधी दल मायजी की शक्ति से घबरा गये है. आज अगर मेरे पास इतना धन होता तो मई मायावतीजी का इतना भव्या मंदिर बनावता जैसा आज तक नही बना होगा. कभी ना कभी तो ज़रूर बनवावँगा. आप सकच्छत देवी का रूप लेकर आवत्वरित हुई है. आप भगवान से भी बदकार है. ग़रीब समाज को आप पर गर्व रहेगा.आज हम जगा जाहाः मंदिर का निर्माण कर रहे है और लाखों म्ण्दिर पहलेब से बने हुए है. जिन पर अराबो रुपया खर्च हुआ है और हो रहा है. क्या वा पैसा ग़रीबों का नही होता है क्या ज़रूरत है ह्यूम मंदिर बनाने की जो सिर्फ़ एक ज़रिया है पैसा कमाने का कुछ खास लोगो के लिए. और उसमे जो भी प्पैसा आता है वो भी लाखों अराबो रुपये उस पैसे का क्या होता है मंदिर बनाने के बजे हम स्कूल अस्पताल डिग्री कॉलेज और भी इंसानो के लिए ज़रूरी चीज़े क्यूँ नही बनाते है. हम जाती धर्म का बँधा क्यूँ नाहो तोड़ राहेब है कोई ठाकुर कोई प्पांडित क्यूँ है जबकि सब इंसान समान है . हम मानव और हमारा धर्म मानवता क्यूँ नही है. देश में एक धर्म ऐसा भी होना चाहिए जो किसी धर्म को न माने सिर मानव और मानवता ही सब कुछ होना चाहिए. अमिताभ का मंदिर बन सकता है तो मायावतीजी का क्यूँ नही मूर्तिया तो शृुख ख़ान सलमान सचिन और ना जाने किसकी लगी हुई है और सब जिविवत् व्ही तो मवावाती जी की क्यूँ नही लग सकती.आज कल हाथी चुनाव चिन्ह को लेकर लोग ज़हीत याचकाय दायर कर रहे है. साइकल और हाथ के खिलाफ क्यूँ नही कर रहे है हाथ लेखार सब गुम्ते है सबके हाथ ही काट जाने चाहिए सब साइकल चलते है उस पर बैन लगना चाहिए क्यूंकी वो सब चुनाव चिंग का ग़लत प्रचार कर रहे है मिसयूज़ कर रहे है.मंदिरो के बाहर और बड़े बड़े धार्मिक कामो मे हाथी को स्वागत के रूप में पेस किया जाता है. अंबेडकर स्मारक में भी हाथियों का प्रयोग स्वागत के रूप मई किया गया है जिसमे हाथियों की ज़्ड ओपर की ओर है जबकि चुनाव चिन्ह मे नीचे की ओर है इतने जल्दी सबको चुनाव चिन्ह सताने लगा है. हाथ और साइकल के चुनाव चिन्ह एकदम कॉपी है उनके ग़लत प्रचार प्र बैन लगना चाहिए. दोनो के चुनाव चिंग ज़ॅप्ट होने चाहिए.देस के लखो मंदिरो मे अरबो रुपये का चढ़वा डेली होता है. और वा कान्हा जाता है किसी को कुछ पता नही चलता. और उसके लिए कभी टॅक्स भी नही लिया जाता है. क्या मंदिरो की आय पर टॅक्स नही लगना चाहिए. ? सबसे बड़ी बात वान्हा पैसा चढ़ाया ही क्यूँ जाता है. और वा भी उन पठार की मूर्तियो पर जो की काल्पनिक है मायजी तो जीती जागती देवी है. जिन्होने ग़रीबो को नया जीवन दिया है. जो की अपने है देश मे उपेक्षित थे. देस के सारे मंदिरो को बदलकर स्कूल, अस्पताल, और लोगो के ज़रूरी स्थान बना देना चाहिए. मंदिरो की कोई ज़रूरत नही है. जो एक ज़रिया है पैसा कमाने का. ह्यूम अच्छे कर्म करने चाहिए जो की देश हिट मे हो. मायावती जी वा सब कर रही है जो देश के लिए ज़रूरी है. हम बीक्सित देश तभी बन पाएँगे जब देश का हर नागरिक समान होगा. और सभी सिक्षित होंगे. सब को बराबर का हक हो. कोई उँचू नीच ना हो. सब को बराबर का जीने का हक है.


topic of the week



latest from jagran