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राम... राम... भगवान

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यह वाक्‍य क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर को तोहफे में मिलेगा। कांग्रेस ने उन्‍हें राज्‍यसभा सदस्‍य का तोहफा दे कर यह पूरी तरह से तय कर दिया है। अब देखना यह है कि यह भविष्‍य का वाक्‍य पहले क्रिकेट जगत से मिलता है या सियासी संसार से। वैसे कांग्रेस ने यह लगभग तय कर दिया है कि अब क्रिकेट के भगवान को विराम लेना चाहिए और संसद इसके लिए सबसे अच्‍छी जगह है। कांग्रेस वास्‍तव में वहां तक सोचती है जहां तक कोई नहीं सोच सकता। मैं भी नहीं और आप भी नहीं। जरा सा पीछे देखिए, जब कुछ क्रिकेटरों ने सचिन को राय दी कि उनको अब संयास ले लेना चाहिए तो करोडों क्रिकेट भक्‍त नाराजा होते चले गए। सचिन भी सुझाव को खारिज कर दिए, शब्‍द के साथ ही बल्‍ले से भी। कांग्रेस ने बीच का रास्‍ता निकाला है। वही कहावत कि सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे, यानी सचिन क्रिकेट छोडे भी नहीं और छूट भी जाए, नहीं तो उनके लिए भारत रत्‍न की मांग करने वाले संसद के रूप में उनके द्वारा लिए गए वेतन व भत्‍ते के औचित्‍य की मांग तो करेंगे ही। कांग्रेस में शामिल हो गए तो दूसरे करेंगे, वरना खुद कांग्रेस ही करेगी। क्‍योंकि सभी लोगों के साथ कांग्रेस भी यह जानती है कि सचिन में नेता यानी लीडर का गुण नहीं है। इसकी परख उनके क्रिकेट रूपी मंदिर में ही हो चुकी है। वह खुद लीडर यानी कप्‍तान की पारी छोड चुके हैं और एक खिलाडी के तौर पर ही क्रिकेट प्रेमियों को बेहतर रिजल्‍ट दे सके हैं। उनमें लीडर योग्‍यता की कमी से ही धोनी जैसे क्रिकेट के लीडर पैदा हुए और हैं। कांग्रेस एक बात और जानती है कि सचिन को न तो सियासत की जानकारी है और न ही वैसे प्रश्‍न जो राज्‍य सभा में पूछे जाएं। अपने खेल के विकास पर सचिन ने जरूर सोचा होगा, लेकिन खेल और खास कर क्रिकेट के विकास पर उन्‍होंने शायद ही कभी सोचा हो। ऐसे में वह संसद में क्‍या करेंगे। कुछ नहीं, यह कांग्रेस खूब जानती है, क्‍योंकि उसके पास क्रिकेट खिलाडी अजहर जो प्रमाण रूप में हैं। कांग्रेस के बाद मुझको भी यह गूढ रहस्‍य मालूम है, क्‍योंकि भरतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्‍तान अजहर कांग्रेस के सांसद है तो मेरी कर्मस्‍थली मुरादाबाद उनका संसदीय क्षेत्र है। यहां उनके सांसद रहते खेल का विकास तो दूर गुल्‍ली डंडा का भी विकास नहीं हो सका है। आम आदमी उनसे बात नहीं कर सकता और वे कभी कभार ही यहां दर्शन देते हैं। यह हाल तब है जब यहां के लोगों ने उन्‍हें वोट दिया है। यह हक तो सचिन पर जनता भी नहीं जा पाएगी, क्‍योंकि वे जनता के वोट से नहीं कांग्रेस के तोहफे से सांसद बन रहे हैं। अजहर ने उनका स्‍वागत किया है, लेकिन क्‍यों, क्‍या जैसा उन्‍होंने सियासत को मुकाम दिया है वैसा करने के लिए, या इस खुशी में कि चलो हम तो सियासत के कुएं में डूबे सनम तुम भी डूबो।
सचिन अगर एक साथ क्रिकेट के मैदान पर कप्‍तान और बल्‍लेबाज दोनों की भूमिका निभा पाने में असफल रहे तो एक साथ सियासतदान और क्रिकेटर की भूमिका कैसे निभा सकते हैं। तब खुद के खेल पर ध्‍यान देने के लिए उन्‍होंने कप्‍तानी छोड दी थी तो क्‍या अब सियासत के लिए क्रिकेट या क्रिकेट के लिए सियासत छोड देंगे। या समय के साथ सियासत और क्रिकेट में से कोई एक बोल देगा राम— राम— भगवान, क्‍योंकि अभी न तो सचिन क्रिकेट से अलग हो रहे थे और न ही उनके प्रेमी ऐसा सोच रहे थे, लेकिन राज्‍य सभा के लिए उन्‍हें नामित करने से ऐसा लगता है कि कांग्रेस उन्‍हें उनके न चाहते हुए भी क्रिकेट से रिटायर करना चाहती है और यह सम्‍मानजनक हो इसके लिए सांसद जैसा पद, वेतन और भत्‍ता देना चाहती है। खैर कांग्रेस को जो देना था वह तो दे दी, आप अपने भगवान को क्‍या सलाह देना चाहते हैं……………………क्रिकेट खेलें या सियासत की पापड बेलें।

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

alokmohan के द्वारा
May 2, 2012

सचिन ने जो इज्जत अपने खेल से कमाई है बहुत जल्दी जाने वाली है

    ज्ञानेन्‍द्र त्रिपाठी के द्वारा
    May 2, 2012

    प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद

gourav के द्वारा
May 1, 2012

मुझे लगता है हमारे भगवान ही नहीं चाहते कि उनके लिए उनके भक्तों का प्यार सरी जिन्दगी बरकरार रहें वह खूद ही धन के पिछे भागते हुए दिख रहे है पहले आईपीएल खेला और अब राज्यसभा.

    ज्ञानेन्‍द्र त्रिपाठी के द्वारा
    May 1, 2012

    ठीक कहा गौरव जी ने, कुछ ऐसा भी हो सकता है, प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद


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